Jail हरियाणा के उद्योग मंत्री राव नरबीर काट चुके हैं 55 दिनों की जेल
सियासी घमासान: राव इंद्रजीत के आरोपों पर राव नरबीर का जवाब, स्वीकारा 55 दिनों का जेल प्रवास

Jail/नारनौल। हरियाणा की राजनीति में अहीरवाल के दो दिग्गज नेताओं के बीच चल रही खींचतान अब खुले मैदान में आ गई है। केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का जवाब देने के लिए हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने नारनौल में एक धमाकेदार प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने न केवल अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया, बल्कि 55 दिनों की जेल काटने के पीछे की पूरी कहानी भी जनता के सामने रखी।
विवाद की जड़: राव इंद्रजीत के तीखे आरोप
बता दें कि हाल ही में केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने बिना नाम लिए या सीधे तौर पर राव नरबीर सिंह पर निशाना कुछ पुराने मामलों की ओर इशारा किया था। राव इंद्रजीत के इन बयानों को राजनीति के गलियारों में राव नरबीर के बढ़ते वर्चस्व को रोकने की कोशिश के रूप में देखा गया।
“हाँ, मैं 55 दिन जेल में रहा” – राव नरबीर का जवाब
नारनौल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह बेहद हमलावर मुद्रा में दिखे। उन्होंने कहा, “मुझ पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि मैं जेल गया था। मैं इसे छुपाता नहीं हूँ। मैं 55 दिनों तक जेल की कालकोठरी में रहा, लेकिन वह भ्रष्टाचार का मामला नहीं था। वह एक राजनीतिक षडयंत्र था।” राव नरबीर ने स्पष्ट किया कि उन्हें जिस मामले में जेल भेजा गया था, उसमें कोर्ट ने उन्हें ससम्मान बरी किया है। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी खेमे पर तंज कसते हुए कहा कि जनता सब जानती है कि कौन विकास के नाम पर वोट मांगता है और कौन केवल महलों की राजनीति करता है।
अहीरवाल के ‘किंग’ बनने की होड़
दक्षिण हरियाणा यानी अहीरवाल की राजनीति हमेशा से राव इंद्रजीत सिंह के इर्द-गिर्द घूमती रही है। उन्हें इस क्षेत्र का निर्विवाद नेता माना जाता रहा है। हालांकि, इस बार के विधानसभा चुनाव और फिर कैबिनेट में राव नरबीर सिंह को मिले महत्वपूर्ण विभागों (उद्योग एवं वाणिज्य) ने समीकरण बदल दिए हैं। राव नरबीर अब गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में विकास कार्यों के जरिए अपनी एक अलग पहचान बना रहे हैं, जो राव इंद्रजीत खेमे को रास नहीं आ रही है।
सियासी प्रभाव और आने वाला समय
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों राव साहबों के बीच की यह तनातनी आने वाले नगर निगम चुनाव और भविष्य की राजनीति पर गहरा असर डालेगी। राव इंद्रजीत जहाँ अपनी ‘साख’ और अहीरवाल पर अपनी ‘पकड़’ को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं राव नरबीर सिंह खुद को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित कर रहे हैं जो संघर्ष से तपकर निकला है।
नारनौल की इस प्रेस वार्ता ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में हरियाणा भाजपा के भीतर यह ‘शीत युद्ध’ और भी गर्मा सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी आलाकमान इन दो कद्दावर नेताओं के बीच की इस खाई को कैसे पाटने का प्रयास करता है।












